आज़ार-ए-उल्फत

अपनी मोहब्बत को किसी और के साथ देखना जानते हो,
पढ़ के तो दर्द समझोगे,
इस दर्द को करीब से पहचानते हो,
जब वो उसका हाथ थाम के घुमा करेगा
जिसने कल तुमसे वादा किया था, कि वह कल तुम्हें रोका करेगा,
उसका नाम जब उसके साथ लिया जाएगा,
जी पाओगे ? यह जहर पिया जाएगा ?
वो जब उसे प्यार से छेड़ेगा, जल जाओगे जब वह उसकी जुल्फों के साथ खेलेगा ,
उसके बाद खुद को ढूँढना पड़ेगा
हर रात रोओगे हर सुबह हंँसना पड़ेगा!!

Saurav Raj

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